शारदीय नवरात्रों के उपलक्ष्य में बही भजन रस गंगा
सवाईमाधोपुर (चन्द्रशेखर शर्मा)। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन गुरुवार को सायंकाल अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के प्रतिष्ठित वैश्विक पटल पर एक भजन संध्या का सवाईमाधोपुर से वर्चुअल आयोजन हुआ। इस भजन संध्या में दिल्ली से उमंग सरीन तथा रंजना मजूमदार,जर्मनी के कोलोन शहर से डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना,गाजियाबाद से संस्था के वैश्विक अध्यक्ष पण्डित सुरेश नीरव और श्रीमती मधु मिश्रा तथा बाघों एवं त्रिनेत्र गणेश की नगरी सवाईमाधोपुर से डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी शामिल रहे।
रंजना मजूमदार ने एक भजन जागो तुमि जागो, जागो दुर्गा दशप्रहरण धारिणी जागो प्रस्तुत किया। मधु मिश्रा ने भजन जिसने ये जोत जलाई उस परिवार के सदके प्रस्तुत किया। डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने भजन जरा फूल बिछा दो राहों में मेरी मईया आन बिराजी हैं प्रस्तुत किया। उमंग सरीन ने भजन बिगड़ी मेरी बना दे ऐ शेरों वाली मईया प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव ने मां दुर्गा और नवरात्रों के वैज्ञानिक स्वरूप और महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी ने कहा कि नवरात्रों में हम हर दिन दुर्गा मां के अलग अलग रूपों की उपासना करते हैं। आज का दिन दुर्गा मां के कूष्मांडा स्वरूप का है। नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्माण्डा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मन्द, हल्की हँसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्माण्डा नाम से अभिहित किया गया है। उन्होंने नवरात्रों के भौतिक, प्राकृतिक तथा आयुर्वेदिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी ने एक भजन इतनी शक्ति हमें देना माता भी प्रस्तुत किया।
गुरुवार देर रात तक चली इस भजन संध्या को भारत एवं विश्व के अन्य अनेक देशों से असंख्य लोगों ने देखा, सुना, आनंद लिया और सराहा।
