आलेख -चंद्रशेखर शर्मा
पीएम मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में सेवा पखवाड़ा राजस्थान में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को भाजपा सेवा पखवाड़ा के रूप में मना रही है। जिसके चलते प्रदेश स्तर से लेकर सभी जिला मुख्यालयों, मंडल और बूथ स्तरों पर जरूरतमंदों की सेवा के विभिन्न कार्य पार्टी द्वारा किए जाएंगे, कार्यक्रम को दिन के हिसाब से बांटा गया है। पीएम मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में सेवा पखवाड़ा राजस्थान में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। रोस्टर को कुछ इस तरह से बनाया गया है, कि हर दिन कुछ ना कुछ सेवा का कार्य किया जाए। ये कार्यक्रम एवं गतिविधियां होगी संचालित
जन्म दिवस की शुरुआत पर विगत दिवस 17 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर और निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का आयोजन किया गया आगे चलकर सर्वश्रेष्ठ जिलों के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के आयोजकों का सम्मान भी इस कड़ी में शामिल हैं। इसके अलावा 18 सितंबर को सभी जिलों में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग व उपकरणों को वितरित करने के कार्यक्रम संपादित होंगे एवं इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ आयोजकों को सम्मानित भी किया जाएगा।रक्तदान और कृत्रिम अंगों का वितरण कितना किया जाना है, ये तय नहीं है। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा है, कि कहीं महज औपचारिकता तो नहीं निभाई जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बताया , कि मोदी सरकार ने 2025 तक भारत को टीवी मुक्त देश बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसको लेकर 20 सितंबर को पूरे देश में 'नि-क्षय' मित्र कार्यक्रम के माध्यम से टीबी को पूरे देश से समाप्त करने का संकल्प लिया जाएगा। इसके साथ जन भागीदारी के तहत इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति /रोगी को प्रत्येक मंडल और वार्ड स्तर पर गोद लेकर उनके भोजन, पोषण और आजीविका के संबंध में सेवा के कार्य पूर्ण किए जायेंगे। वहीं 21 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रदेश और जिला स्तर पर प्रदर्शनीयां लगाई जाएंगी, यह प्रदर्शनी नमो एप पर भी उपलब्ध रहेगी l 'मोदी@20' पुस्तक सहित पीएम मोदी के कृतित्व और व्यक्तित्व से जुड़े प्रमुख साहित्य की पुस्तकें प्रदर्शनी में शामिल होंगीl क्या लंपी वायरस के कहर को देखते हुए व गायों के दर्द को समझते हुए 'सेवा पखवाड़ा' को 'गौसेवा पखवाड़ा' का नाम नहीं दिया जा सकता है
प्रदेश में तमाम कोशिशों के बावजूद भी लम्पी वायरस का प्रकोप नियन्त्रण से बाहर है। कोरोना की तरह इस बीमारी से निपटने के लिए अब तक जो प्रयास सरकार और लोगों द्वारा किए जा रहे हैं और नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं। इस स्थिति में गोवंश को बचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। भाजपा द्वारा ऐसे में 22 और 23 सितंबर को सभी मंडलों में गौ सेवा के रूप में गौ माता की सेवा, उनके स्वास्थ्य और टीकाकरण को लेकर सेवा कार्य होंगे। कितने गौवंश को टीकाकरण किया जाना है, कोई रूपरेखा नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस सवाल के जवाब में भी कहा कि कोई आंकड़ा नहीं है। "गाय हमारी माता है", का गुणगान करते नहीं थकने वाली भाजपा न जाने क्यों गौ सेवा से हाथ खींचती हुई नजर आ रही है।इस दिशा में जो प्रयास भाजपा को आम जनता के साथ मिलकर करने चाहिए उस दिशा में भाजपा द्वारा श्रमशक्ति का भरपूर इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। जबकि होना यह चाहिए कि लंपी वायरस के प्रकोप को देखते हुए भाजपा प्रधानमंत्री के जन्मदिवस को सेवा पखवाड़े के बजाय गो सेवा पखवाड़ा मानकर चले तो राज्य में गोवंश का कुछ हद तक भला हो सकता है, उन्हें काल का ग्रास बनने से बचाया जा सकता है। क्योंकि राज्य सरकार तो सिर्फ कागजों में ही गौ सेवा का गुणगान कर आम जनता को भ्रमित करने में लगी हुई है। कांग्रेस पार्टी व सत्तासीन सरकार द्वारा गौवंश के उपचार हेतु युद्ध स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है ना ही उठाया जा रहा है। समय रहते हुए इस दिशा में बड़े पैमाने पर कोई विशेष अभियान चलाया गया होता तो लाखों गायें जो इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर मर गई उन्हें बचाया जा सकता था। धरातल पर काम करने की बजाय सरकार द्वारा विज्ञापन प्रसारित कर प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में गौ सेवा का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। दुनिया दिखाई के लिए कांग्रेस के विधायकों की ओर से दो -पांच लाख रुपए विधायक मद से जारी कर गायों के प्रति हमदर्दी एवं जनता के दिल में जगह बनाई जा रही है। हालात यह है, कि लंपी वायरस राजस्थान में महामारी का रौद्र रूप धारण कर कहर बरपा रहा है। अब तक बीकानेर सहित पूरे राज्य में 2 से ढाई लाख गौवंश (जिनमें अधिकांश देशी नस्लकी गाय एवं उनके बछ़ड़े शामिल हैं) काल का ग्रास बन चुका हैं। सरकार भले ही तथ्य छुपाने के लिए मौत के अलग आंकड़े पेश करें। लेकिन सच्चाई यही है। सरकार की अकर्मण्यता की एक बानगी पिछले दिवस सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय पर भी देखने को मिली जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सवाई माधोपुर दौरे पर आकर ' मियां मिट्ठू ' बनने वाली बात(अपने मुंह से अपनी और अपने चाहतों की बड़ाई ) तो कह गए यानि की यथार्थ से परे घोषणाओं का अंबार लगा कर आमजन को अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ अपने शागिर्दों एवं कारिन्दों के कामों की चर्चा कर उनकी पीठ तक को थपथपा गए। लेकिन लंपी बीमारी एवं गौ माता के पक्ष में उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला , ऐसा लगा कि मानो की किसी ने उनकी जुबान पर ताला जड़ दिया हो। लेकिन मुख्यमंत्री जी को कौन समझाए कि अब जनता- जनार्दन विशेष कर युवा वर्ग अपना भला बुरा अच्छे से समझता है, उसे चिकनी चुपड़ी बातों से नहीं बहलाया जा सकता। और अब थोथी घोषणाओं से काम नहीं चलेगा क्योंकि अब धरातल पर काम चाहिए। समय का खेल और विडंबना देखिए मनुष्य के सुख- दुख में आढ़े आने वाली एवं अधिकांश व्यक्तियों की सेवा एवं सुरक्षा करने वाली गौमाता आज स्वयं दूसरों पर आश्रित हो चली है। गोवंश के साथ-साथ गोपालक भी बेहद चिंतित हैं। गरीबों के बच्चे गाय के दूध से वंचित होते जा रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर गाय की सुध लेने वाला कोई नहीं है। भामाशाह, विभिन्न सामाजिक संगठन अपने अपने स्तर पर जरूर गौमाता को लंपी वायरस से बचाने का रात दिन प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महामारी को रोकने के लिए यह प्रयास नाकाफी है। प्रदेश में कोई गाय के लिए आवाज देने वाला नजर नहीं आ रहा हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा एवं उसके कार्यकर्ताओं को आगे आना चाहिए। और तन मन धन से गौ माता की सेवा करते हुए उसके ऋण से उपकृत होना चाहिए। रक्तदान शिविर, जरूरतमंदों की सेवा एवं दिव्यांगों को उपकरण वितरण जैसे कार्यक्रम तो आगे चलकर भी संपादित किए जा सकते हैं। लेकिन अगर समय रहते हुए संकटग्रस्त गोवंश को नहीं बचाया गया तो राज्य एवं देश के हालात आगे चलकर और विकट होंगे।( उपसंपादक एवं विशेष संवाददाता,माटी की महक न्यूज़ राजस्थान ) नोट- यह लेखक के अपने विचार हैं।

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