पंच परमेष्ठी विधान में चढ़ाए 151 अर्घ्य
माटी की महक किशनगढ़।श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत के तत्वावधान एवं आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में अष्टान्हिका पर्व के तहत पंच परमेष्ठी विधान एवं अखंड णमोकार मंत्र का पाठ के तीसरे दिन रविवार को विधानाचार्य स्वतंत्र भैया के निर्देशन में सिटी रोड स्थित जैन भवन में प्रातः जिन सहस्त्रनाम पाठ व 1008 मंत्रो के द्वारा श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा की गई। तत्पश्चात विधान पुण्यार्जक श्री पार्श्वनाथ महिला मंडल के सदस्यों के साथ अनेक श्रावक श्राविकाओं ने मधुर संगीत पर भक्ति भाव से विधान पूजन में 151 अर्घ्य समर्पित किए। जैन भवन में सामूहिक अखंड णमोकार मंत्र पाठ चल रहा है। विधान पूजन के दौरान आर्यिका विभाश्री माताजी ने मंगल प्रवचन देते हुए संसार में सब जीव सुख चाहते हैं, दु:ख कोई भी चाह नहीं करता। संसार में संयोग वियोग, सुख-दु:ख आना जाना लगा रहता है। हमें अपने जीवन के एक-एक दु:ख बनाए रखना चाहिए। जिससे हम भगवान को याद करते रहेंगे। णमोकार मंत्र की महिमा बताते हुए आर्यिका माताजी ने कहा कि णमोकार मंत्र का जाप करने से सभी संकटों का नाश होता है। रोग शोक की बाधाएं दूर होती है। पुण्य कर्म का बंध होता है। मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने दिन भर के किए हुए पापों को काटने के लिए प्रतिदिन णमोकार मंत्र का जाप करना चाहिए। सदैव सुख में रहते हुए व्यक्ति अहंकारी हो जाता है। व्यक्ति सबसे ज्यादा पाप खुशी में करता है। जितना ज्यादा खुश होता है उतनी ज्यादा पाप करता है। जो हम पूर्व जन्मों में पाप कर्म करके आए हैं उनका फल तो भोगना ही पड़ेगा। जीवन को सार्थक करने के लिए प्रभु की शरण जरूरी है। सायं आनंद यात्रा व आरती का आयोजन किया गया। संजय जैन ने बताया कि कार्यक्रम में पंचायत अध्यक्ष विनोद कुमार पाटनी, अनदीप बाकलीवाल, कैलाश पाटनी, कमल पहाड़िया, दिनेश पाटनी, कमल वेद, चेतन प्रकाश पांडया, सुशील पाटनी, अनिल सोनी, चंद्र प्रकाश वेद, मांगीलाल झांझरी, पदम गंगवाल, धर्मचंद गोधा के साथ श्री पार्श्वनाथ महिला मंडल की कांता देवी पाटनी, मंजू गोधा, सुलोचना कासलीवाल, कुसुम दोषी, अनुराधा अजमेरा, मुन्नी पांड्या, रश्मि गंगवाल, सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।
