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 MAATI KI MAHAK NEWS
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  माटी की महक न्यूज़ @भैरू सिंह चौहान किशनगढ़।आचार्य सुनील सागर महाराज ने आर के कम्युनिटी सेंटर में मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि प्रत्येक वस्तु स्वतंत्र है और प्रत्येक द्रव्य का परिमणन स्वाधीन है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं कर सकते, केवल अपने आप में परिवर्तन करने पर कल्याण होगा। परिवर्तन अपने हिसाब से होता है। दुनिया की नहीं स्वयं की जिम्मेदारी निभाओ। देह का भला करने पर कुछ हाथ नहीं आता है इसलिए आत्मा का भला करने वाले परमात्मा बन जाते हैं। मुनियों का संयोग आसानी से नहीं मिलता है। आत्मा की स्वतंत्रता की बात जैन दर्शन में मिलती है। भगवान परम स्वतंत्र द्रव्य है जिसने सारे विकारों को मिटा दिया जिसे कुछ नहीं चाहिए वह परमात्मा कहलाता है। जिसने इस मार्ग को समझ लिया वह अंतर्रात्मा तथा देह के स्तर पर जीता है वह वह बहिर्रात्मा कहलाता है। जैन धर्म, जिनेंद्र भगवान, जैन संत सब जगह नहीं मिलते हैं। भेद विज्ञान की कला जैन धर्म सिखाता है। वीतराग जैन धर्म वस्तुनिष्ठ विज्ञान वाला धर्म है। इसमें वही कहा जाता है जो होता है। इसके बल पर ही सम्यक दर्शन होता है। आचार्यश्री ने कहा कि पुण्य भी कर्म होते हैं। ऐसे कर्म करो की पुण्य कभी कम नहीं होना चाहिए। देव, शास्त्र, गुरु की आराधना एवम जिनवाणी का श्रवण करने से पुण्य मिलता है। काय, मन, वचन को आत्मा मानने पर संसार है। व्यक्ति की योग्यता के अनुसार ही कार्य को समझता है। मन, वचन, काय आत्मा से भिन्न होते हुए भी मोक्ष मार्ग में सहयोगी बनती है। मुनियों को प्रणाम करने से उच्च गोत्र, दान करने से भोग, उपासना करने से पूजा और भक्ति करने से सुंदरता  बनी रहती है। वर्षायोग समिति के सह संयोजक  प्रकाश काला ने बताया किचित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलित, आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य रमेश चंद, सुशीला देवी अमरावत उदयपुर को मिला। दोपहर में सामयिक, स्वाध्याय, शाम को पण्य पुच्छा एवम आरती की गई। इस दौरान अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे

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