किशनगढ़। आचार्य सुनील सागर महाराज ने रविवार को सन्मति समवशरण में धर्मोपदेश देते हुए कहा कि इंसान अपने शरीर की शुगर तो चेक करवाता है, लेकिन जुबान की कड़वाहट चेक करना भूल जाता है। यदि जुबान की कड़वाहट खत्म हो जाए तो जिंदगी की सारी समस्या समाप्त हो जाएगी। जुबान की कड़वाहट से समाज व देश का नुकसान होता है। जुबान जोड़ने व तोड़ने का काम करती है। कान भरने वाले नारद के चक्कर में आने वाले सभी परेशान रहते हैं और उनकी बातों में ध्यान नहीं देने वाले आनंद से जीवन यापन करते हैं। जहां पद्मिनी नाम की स्त्री का निवास, जहां राजहंस पक्षी रहते हैं और दिगंबर मुनि का निवास तथा विहार होता है उस देश में हमेशा शुभ होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि असम, महाराष्ट्र, मणिपुर क्षेत्र में तपस्वियों मुनियों का प्रवास नहीं है उनका हाल बुरा है। जहां मुनि तपस्वी रहते हैं वहां सुख शांति रहती है। पाप करने वालों ने तो गाय की हत्या, त्योहारों के नाम पर जीव हत्या, मां-बाप को भी नहीं छोड़ते। सत्य व सुख का संरक्षण तपस्वी संत करते हैं। संतो के दर्शन से लाभ पुण्य मिलता है। मुनि कोई चमत्कार नहीं करते हैं। परोपकार करने से सभी का मंगल होता है। दिगंबर देवता तो धरती के चलते फिरते तीर्थ होते हैं। संतो के सानिध्य का फायदा हमेशा लेने वाला बुद्धिमानी होता है। महोत्सव से समाज में खुशी का माहौल बनता है। भ्रम सदा नुकसानदायक होता है। आधुनिक चीजों के गुलाम नहीं बनना चाहिए। दुनिया की खबर के साथ- साथ स्वयं की खबर रखकर स्वयं को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। विजय हमेशा सत्य की होती है। आचार्यश्री ने समाधि तंत्र गाथा ग्रंथ पर प्रवचन देते हुए सभी को मंगल आशीर्वाद दिया। वर्षायोग समिति के संयोजक कैलाश पाटनी ने बताया कि धर्मसभा से पूर्व आरके कम्युनिटी सेंटर में सुबह श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, धर्मसभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्यारी देवी, सुभाष चंद, कमल, विजय, शकुंतला, सौरभ, जूही, नवधा गंगवाल परिवार सिराणा वाले को मिला। दोपहर सामायिक, स्वाध्याय तिलोय पण्णत्ती, शाम को प्रतिक्रमण, पण्ह पुच्छा, आरती, शास्त्र स्वाध्याय आदि कार्यक्रम हुए।


