जो शरीर धारण नहीं करता है वही परमात्मा है - स्वामी धर्म देव आर्य
आत्मानंद वैदिक गुरुकुल मलारना चौड़ में महाशय धर्मपाल गुलाटी के जन्म दिवस पर वैदिक यज्ञ का आयोजन मलारना डूंगर। सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर उपखण्ड क्षेत्र के मलारना चौड़ कस्बे में स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्वामी आत्मानंद वैदिक गुरुकुल में बुधवार को देश के सुप्रसिद्ध समाजसेवी व भामाशाह रहे पद्म भूषण अमरयाज्ञिक महाशय धर्मपाल जी गुलाटी(एमडीएच ग्रुप, नई दिल्ली) के अवतरण दिवस पर बुधवार को एक दिवसीय वैदिक यज्ञ का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस दौरान हवन -यज्ञ, भजनोंपदेश,सत्संग एवं संत प्रवचन के साथ सामूहिक प्रसादी वितरण जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। अंतरराष्ट्रीय संत (आर्य समाज) एवं गुरूकुल संचालक स्वामी सोमदेव आर्य ने बताया कि सुप्रसिद्ध समाजसेवी व अमरयाज्ञिक महाशय स्व. धर्मपाल जी गुलाटी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में उक्त कार्यक्रमों का विभिन्न संत-महात्माओं, यज्ञाचार्यो की उपस्थिति एवं सानिध्य में सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेष कर गुरूकुल के ब्रह्मचारीयों(गुरुकुल में अध्ययनरत विद्यार्थियों) द्वारा सैकड़ों यज्ञवैदिकाओं में शुद्ध गो-घृत एवं समिधा को लेकर हजारों आहुतियां दी गई। जिसके चलते सम्पूर्ण वातावरण महक उठा। महत्वपूर्ण बात तो यह है, कि इस बार कस्बे के भीतर एवं आस-पास के क्षेत्र में संचालित आधा दर्जन राजकीय व गैर राजकीय विद्यालयों में अध्यनरत( एक से बारहवीं कक्षा) विद्यार्थियों ने अपने गुरूजनों के साथ शिरकत की और वैदिक महायज्ञ से जुड़े कार्यक्रमों से भलीभांति परिचित हुए। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आचार्य स्वामी सोमदेव आर्य ने आध्यात्मिक प्रवचन में कहा कि, मुख्य रूप से पांच बलों की जीवन में सर्वाधिक प्रधानता होती है। उन्होंने सभी पांच बलों यथा धनबल, शरीर बल,जनबल, बुद्धि बल एवं आत्मिय बल ( आत्मा का बल) पर सभी श्रृद्धालुओं को विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि पांचों बलों में आत्मबल सबसे श्रेष्ठ बल है, और ईमानदारी से अपने कर्तव्य के पालन से ही आत्म बल की प्राप्ति संभव है। उन्होंने यह भी कहा,कि जीवन की सफलता में पांच बलों का सर्वाधिक महत्व है। हरियाणा से पधारे आचार्य स्वामी धर्मदेव जी आर्य ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि जो शरीर धारण नहीं करता है वही "परमात्मा" है, उन्होंने यह भी कहा कि जो सृष्टि का निर्माण करें, उसका पालन करें एवं उसका संहार करें वही सच्चे अर्थों में परमात्मा है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं श्री योगनिष्ठ श्री कृष्ण जैसे पात्रों को ईश्वर की बजाय महापुरुषों की संज्ञा प्रदान की और उनके बताए मार्ग पर चलने की बात कही। आर्य समाज के संस्थापक एवं युग दृष्टा स्वामी दयानंद सरस्वती एवं उनके द्वारा लिखित सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ पर भी प्रकाश डाला गया। गुरुकुल मंत्री आचार्य दामोदर प्रसाद आर्य ने बताया कि इस अवसर पर उच्च माध्यमिक भारती विद्या मंदिर, उच्च माध्यमिक मां भगवती विद्या मंदिर, डीएस एकेडमी मलारना चौड़,राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मलारना चौड़, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गालद कलां एवं सरस्वती विद्या मंदिर, निमोद के हजारों छात्र-छात्राओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर गुरूकुल संचालक स्वामी सोमदेव आर्य के अलावा स्वामी धर्मदेव आर्य (हरियाणा), वैद्य रमेश जी एवं रमेश मुनि जी आदि भजनोंपदेशक एवं सत्संगकर्ता मंचासिन रहे।
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