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 MAATI KI MAHAK NEWS
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माटी की महक किशनगढ़। विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नगर में पथ संचलन  व शस्त्र पूजन कर अपना स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन अजमेर रोड स्थित लक्ष्मीनारायण विहार से आरंभ होकर पुराना बस स्टैंड, पाक पैट्रोल पम्प, मुख्य चौराहा, पुरानी मिल चौराहा, लायंस क्लब सर्किल से होते हुए रविन्द्र रंगमंच पहुंचा जहां स्वयंसेवकों ने शस्त्र व शास्त्र पूजन व दण्ड व्यायाम का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नगर की अनेक संस्थाओं, संगठनों व समाजसेवी लोगों ने पुष्प वर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया। जिसमें संस्कार भारती, विद्या भारती, शिक्षक संघ, सहित अन्य शामिल थे । रविन्द्र रंगमंच पर आयोजित स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग माननीय संघचालक, जिला संघचालक, नगर संघचालक व विभाग प्रचारक शिवराज सिंह ने शस्त्र व शास्त्र पूजन किया। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए विभाग प्रचारक शिवराज सिंह ने बताया कि  हमें हमारा ही झूठा इतिहास पढ़ाकर कमजोर करने का षड़यंत्र कर अपने वास्तविक इतिहास व सच्चाई से दूर रखा गया। यहां यह जानना आवश्यक है कि यह षड़यंत्र बहुत लम्बे समय से चलता रहा है। हमें यह पढ़ाया जाता है कि वास्को डी गामा जब भारत आया तब वह विश्व का सबसे बड़ा जहाज़ लेकर आया जिसमें 600 टन माल ढुलाई हो सकती थी जबकि सच्चाई यह है कि उसी समय हमारे भारत में ही 1600 टन माल ढुलाई की क्षमता के जहाज मौजूद थे। अंग्रेज जब भारत आए तो उन्होंने हमें यह झूठ सिखाने का प्रयास किया कि हमारा कपड़ा सबसे उच्च श्रेणी का है जबकि उससे पहले ही भारत में एक नारियल के खोल में पांच सौ मीटर कपड़ा लेकर विदेशों में भेजा जाता था। लेकिन हमें यह कभी नहीं बताया गया कि हमारे पास इतनी उच्च तकनीक मौजूद थीं। क्योंकि वो कभी भी हमारे तकनीकी ज्ञान को अपने आप से श्रेष्ठ नहीं बताते थे। इतना ही नहीं भारत के धर्म और शास्त्रों में मौजूद चिकित्सा, शिक्षा और विज्ञान को बाहर से आए आतताइयों ने कभी स्वीकार नहीं किया बल्कि उसी ज्ञान को रिसर्च के नाम पर हमारे ही ज्ञान को पुनः खोजकर उसका रूप व नाम बदलकर हमें अपने नाम से परोसा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब पूरा विश्व गणित के ज्ञान में भारत प्राचीन काल से ही सिरमौर था जिसमें शून्य का आविष्कार हमने किया, आज जिस पायथोगोरस प्रमेय के नाम से विदेशी ज्ञान का ठिंठोरा पीटा जा रहा है वह उससे हजारों वर्ष पहले ही हमारे विद्वानों प्रस्तुत कर दिया था। साथ ही आज दुनिया को वैदिक गणित के माध्यम से भारत के ज्ञान का डंका बज रहा है तो गौरवशाली इतिहास आज पुनः हमें पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे पहले सर्जन चरक थे। उन्होंने स्वयंसेवकों को एक दृष्टांत सुनाते हुए बताया कि जब जब लंका में रावण की सेना ने परास्त होकर ने बताया कि श्रीराम की सेना में एक वानर है जो राक्षसों को अपनी पूंछ के प्रहार से अंतरिक्ष में उछाल देता है और उसके भय से सभी राक्षस घबराए हुए हैं। तब रावण भी वहां गया तब हनुमान जी ने उसे भी अपनी पूंछ से उछाल कर अंतरिक्ष में पहुंचा दिया तब रावण ने घबराकर शिव को याद किया। तब शिव ने हनुमानजी को कहा कि इसका वध तो श्रीराम के हाथों से होना है, तब हनुमानजी ने उसे छोड़़ दिया। शिवराज सिंह जी ने एक अन्य कथा के माध्यम से हनुमानजी द्वारा राजा बाली के घमण्ड को तोड़ने की बात कही। साथ ही कहा कि सभी यह कहते हैं कि हनुमान को नहीं छेड़ना क्योंकि इनकी शक्ति का कोई पता नहीं लगा सकता है। ऐसे ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं जो हनुमान जी का रूप हैं। जिसे कोई नहीं छेड़ना नहीं चाहते हैं। क्योंकि स्वयंसेवक की शक्ति का भी कोई पता नहीं होता है, हर स्वयंसेवक हनुमानजी का रूप है।अन्त में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई की कविता से उपस्थित स्वयंसेवकों में ऊर्जा का संचार किया।

पथ संचलन का जगह जगह भव्य स्वागत

भारत विकास परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा निकाले गये विराट पथ संचलन का सुमेर सिटी सेंटर के बाहर पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया । सभी सदस्यों ने वंदेमातरम एवं भारत माता की जय के उद्घोष के साथ पथ संचलन मे शामिल स्वयंसेवको पर पुष्प वर्षा की गई। आज के कार्यक्रम में अध्यक्ष भरत सराफ, सचिव प्रहलाद अग्रवाल, राजेश कामदार, गोविंद अग्रवाल, महेश राजपुरा, विजय शर्मा, मनीष राजपुरोहित, महेंद्र मित्तल, ओमप्रकाश मैनावत, राजेश राठी, कमल वैद, मुकुट बिहारी मालपानी, अजय अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, प्रोफेसर एस.के. बंसल, कमल मोर, भगवान स्वरूप बाहेती, सुनील अग्रवाल, चंद्रप्रकाश सोनी, रमेश सेठी, दिनेश अग्रवाल, अनिल गोयल, रामावतार अग्रवाल, घनश्यामदास अग्रवाल आदि की मौजूद रहे । 





 

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