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घुटने भर पानी से निकाली शवयात्रा, अंतेष्टी के लिए भी झेलनी पड़ी परेशानी, मलारना चौड़ की घटना       
                                                                                        सवाई माधोपुर (चन्द्रशेखर शर्मा)। उपखण्ड क्षेत्र के मलारना चौड़ कस्बे में विकास के दावे तब खोखले साबित होते हुए नजर आए जब सर्व समाज के श्मशान घाट पर पहुंचने के लिए शव यात्रा में शामिल लोगों को शव के साथ घुटनों तक (तकरीबन 3 फिट) पानी से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान उन्हें जिस मुश्किल का सामना करना पड़ा, उस का आभास सिर्फ उन्हीं को है। आपको बता दें कि कस्बे में दोनों ही पार्टीयों के नेता एवं जनप्रतिनिधि विकास के अपने अपने दावों को लेकर दम भरते हुए देखे जा सकते हैं। लेकिन इस तरह की घटना उनके खोखले दांवों को बेपर्दा करते हुए  दिखाई देती है। मलारना चौड़ कस्बे में विधायक से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों को चुनौती देती हुई एक यह तस्वीर जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे गांव के लोगों के पास पहुंची तो  उनके आश्चर्य  का ठिकाना नहीं रहा। यही नहीं  गांव वाले भी घटना को लेकर शर्मिंदा हैं। मलारना चौड़ कस्बे में स्थित सर्व समाज के श्मशान घाट की स्थिति इस युग में भी पुराने या अविकसित जगहों की तस्वीर बयां करती है। पूर्व एवं वर्तमान ग्राम पंचायत प्रशासन लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी श्मशान घाट की कायापलट करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। श्मशान घाट में बरसात के मौसम में विकट  हालात देखने को मिलते हैं, यही नहीं अतिक्रमण की समस्या भी यहां हमेशा मुंह बांएं खड़ी रहती है। श्मशान घाट के भीतर चारों ओर जहां घुटनों घुटनों भरा बरसाती पानी जहां आवाजाही में बाधक है, वहीं किचड़ एवं गंदगी के चलते सड़ांध मारता पानी भी बिमारी को निमंत्रण देने वाला है। फिलहाल अंतिम यात्रा में शामिल होने वालों को यहां भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक  शव तक कोअंत्योष्टि के लिए ले जाने के लिए ग्रामीणों को घुटने भर पानी से गुजरना पड़ रहा है। विगत दिवस एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की मृत्यु होने पर जब मृतक के परिजन एवं गांव के लोगों ने श्मशान घाट का रूख किया तो, वे अपने ही गांव के हालातों पर तरस खाते हुए नजर आए। शव यात्रा में शामिल लोगों को 3 फिट गहरे पानी में से होकर गुजरना पड़ा,इस दौरान कई बार शव यात्रा को अपने कंधों पर उठाकर चलने वाले लोग  एवं अन्य बुजुर्ग व्यक्ति गिरते गिरते बाल बाल बचे।  ऐसा नहीं है, की सत्ता में बैठे लोगों को इस बात की खबर नही है। इस समस्या को लेकर स्थानीय लोग कई मर्तबा ग्राम पंचायत प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक व आला जनप्रतिनिधियों तक की चौखट  के चक्कर काट चुके हैं। लेकिन समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। समस्या को लेकर ग्रामीणों में भयंकर रोष व्याप्त है। अब देखना यह है कि, कौन इस दिशा में पहल करता है, ताकि समस्या से शीघ्र छुटकारा मिल जाए, नहीं तो काम तो पहले भी चल ही रहा था,तो आगे भी चलने में कोई हर्ज नहीं है।

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