भाजपा नेत्री आशा मीणा का लगातार तीसरे दिवस क्षेत्र का दौरा ,सामाजिक- सांस्कृतिक व धार्मिक समारोह मे हुई शामिल, आमजन से मुलाकात कर सुनी जनसमस्याएं सवाई माधोपुर ( चन्द्रशेखर शर्मा)। सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय पर गुरुवार को एक ओर जहां राज्य में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी के स्थानीय विधायक दानिश अबरार का राजनैतिक मंच पर दबदबा कायम होता हुआ नजर आया, वहीं दूसरी और विधानसभा चुनाव लड़ चुकी भाजपा नेत्री आशा मीणा भी शहरी समेत ग्रामीण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा आमजन के बीच अपनी स्वच्छ राजनैतिक छवी की गहरी छाप छोड़ती हुई दिखाई दी। कहने का तात्पर्य यह है, कि भाजपा नेत्री आशा मीना लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी सवाई माधोपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रही और विभिन्न जगहों पर आयोजित सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के संग भाग लिया। वैसे देखा जाए तो सवाई माधोपुर जिले वासियों के लिए गुरुवार का दिन विशेष रुप से हर्षोल्लास व उमंग का दिन था। क्योंकि आज परम शूरवीर महाराजा राव हम्मीर की कर्म स्थली एवं त्रिनेत्र गणेश जी महाराज की इस पावन धरा पर मतलब सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आगमन जो हुआ था। और तो और सच बात तो यह है कि, यहां की भोली- भाली जनता को कुछ नवीन घोषणाओं की मुख्यमंत्री से प्रबल आश थी, शायद मुख्यमंत्री के मुंह से वो लोग प्रत्यक्ष रूप से कुछ नया सुनने आए हुए थे, जो की आगे चलकर उनके लिए कल्याणकारी व हितकारी साबित हो। लेकिन उन्हें यहां सिर्फ मायूसी और निराशा ही हाथ लगी। मंच से किसी प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की नई सौगात नहीं मिली। क्योंकि यहां विकास व जनभावनाओं एवं लंपी बीमारी से ग्रस्त काल का ग्रास बन रही गौ माताओं के इलाज को लेकर कोई विशेष निर्देश जारी नहीं हुए। स्थानीय कांग्रेस पार्टी एवं पार्टी पदाधिकारियों एवं उसके बड़े नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों में मंच पर कुर्सी पाने की होड़ में आपसी फूट एवं एक दूसरे को नीचा दिखाने की कवायद या फिर नाराजगी जाहिर करने को लेकर नौटंकी तक का नजारा जरूर स्पष्ट रूप से देखने में नजर आया। स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं कांग्रेस पार्टी के मुखिया डोटासरा भी स्थानीय विधायक दानिश अबरार का गुणगान एवं बरदावली के कसीदे गढ़ते हुए देखे गए। एक और जहां मुख्यमंत्री के आगमन के चलते सवाई माधोपुर विधानसभा को कुछ ज्यादा तवज्जो मिलने से स्थानीय विधायक का जोश और जुनून देखते ही बन रहा था वहीं दूसरे अन्य कांग्रेसी एवं कांग्रेस समर्थित विधायक तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री मंच पर सम्मान जगह नहीं मिल पाने के कारण अपने आप को मायूस एवं लज्जित समझ रहे थे। देखने में आया कि एक विधायक तो इस बात से खफा हो मंच से उतरकर नीचे पब्लिक के बीच पाण्डाल में आकर बैठ गए। बाद में मान मनवार करके मंच पर लाकर बिठाया गया।उधर भाजपा नेत्री आशा मीणा भी विधान सभा में सम्मिलित ग्रामीण क्षेत्र में अपना राजनैतिक कद एवं वर्चस्व दोनों ही बढ़ाते हुई नजर आई। ज्ञातव्य है कि मिशन 2023 को लेकर इन दिनों सवाईमाधोपुर जिले में दोनों ही पार्टीयों एवं अन्य पार्टियों के बड़े व छुटभय्ये नेता भी संभावित उम्मीदवारी के चलते जनता के बीच पहुंचकर जनता की सेवा करने एवं उनका दिल जीतने की तमाम कोशिशों में लगे हुए हैं। जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तमाम विकास के दावों (जिनका अभी धरातल पर कोई वजूद नहीं है सिर्फ और सिर्फ घोषणाएं है ) के बलबूते जनता जनार्दन को आकर्षित करने में ना तो वर्तमान विधायक कहीं पीछे है ना ही विधानसभा चुनावों में भाजपा से विधानसभा प्रत्याशी रही भाजपा नेत्री केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का गुणगान करते हुए नहीं थक रही है। गौरतलब है, कि पूर्व की अपेक्षा इस बार आशा मीणा राजनीतिक मंच पर मजबूत होकर आगे बढ़ रही है। किसी भी दशा में वह वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों से किसी भी पेमाने या स्तर पर कमजोर नजर नहीं आ रही है। लगातार देखने में आया है कि जनता जनार्दन का साथ एवं सहयोग तथा आशीर्वाद उन्हें अनवरत मिल रहा है। मीना की कार्यशैली ने लोगों की मानसिक विचारधारा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। सुख और दुख की घड़ी में लोगों के बीच अनायास ही पहुंचकर उनके दुखों को बांटना एवं सुखों के पलों में भी जनता के बीच खड़े होने की प्रवृत्ति ने ओके मन में विश्वास की भावना पैदा की है। गुरूवार को एक और जहां स्थानीय विधायक दानिश अबरार सूबे के मुखिया अशोक गहलोत एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मंच साझा कर जनता को अपनी राजनीतिक पहुंच का लोहा मनवाते हुए नजर आए वहीं जनप्रिय भाजपा नेत्री आशा मीणा भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सादगी पूर्ण तरीके से आमजन के बीच उपस्थित रही। आशा मीणा ने आज भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सर्वप्रथम सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय पर खेरदा क्षेत्र में देलवाल जी महाराज के मेले में शिरकत की और लोक देवता देलवाड़ जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी बीच भाजपा जिलाध्यक्ष डा. भरत लाल मथुरिया, देवेंद्र सिंह राठौड़, हरिओम गर्ग, हरी प्रसाद गुप्ता जैसे दर्जनों पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उनके साथ रहे। मेला स्थल पर पहुंचने पर आयोजकों की और से भाजपा नेत्री का बखूबी स्वागत सम्मान किया गया। सम्मान से वशीभूत आशा मीणा ने मेला समिति के लोगों का आभार जताया । इसके बाद आशा मीणा ने अपने समर्थकों के साथ बम्बोरी गांव में आयोजित पद दंगल समारोह में शिरकत की। यहां पद गायन पार्टियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की, गायक कलाकारों द्वारा आशा मीणा के सम्मान में भी त्वरित गीत तैयार कर रोमांचक अंदाज में गाया गया "सेवा करती- करती दुनियां में नाम कमा जागी,मौका आवेगो जब विधायक आशा बण जागी."..... जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रोता झूम उठे। कार्यक्रम के अंत में भाजपा नेत्री ने बम्बोरी वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपने बतौर मुख्य अतिथि बुलाकर जो मान-सम्मान मुझे दिया उसके लिए में सभी ग्रामवासियों की तहेदिल से आभारी प्रकट करती हूं। आपको बता दें की भाजपा नेत्री आशा मीणा की लोकप्रियता का ग्राफ सवाई माधोपुर विधानसभा क्षेत्र में दिनों दिन तेजी से बढ़ता हुआ जा रहा है। वो इसलिए कि आशा मीणा गांव- गांव, ढाणी -ढ़ाणी यहां तक कि शहरी क्षेत्र में भी आम जनता के बीच लगातार उपस्थित रहकर उनके सुख- दुख में उनकी बराबर की साझेदार जो बन रही हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो आशा मीणा ने सवाई माधोपुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व व वर्तमान नेताओं व जनप्रतिनिधियों की नींदे हराम कर रखी है और सारे राजनैतिक समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं। कई नेता अपने भविष्य को लेकर खासे चिंतित हैं। मीना के बढ़ते कद पर लगाम लगाने केलिए ही शायद सूबे के मुखिया को सवाई माधोपुर की मजबूरी में यात्रा जो करनी पड़ी है, इस बात से यही जाहिर होता है। सवाई माधोपुर जिले में नहीं अन्य जिलों में भी जनप्रतिनिधि अपनी कुर्सी बचाने के लिए एडी से लेकर चोटी तक का जोर लगा रहे हैं। जनता के बीच आशा मीणा के बढ़ते प्रभाव को एवं बढ़ते राजनीतिक वर्चस्व को कम करने के लिए आगे चलकर भी और कई तरह के दांव-पेच खेले जा सकते हैं। ऐसा चुनाव गणितज्ञ मानते हैं। विपक्षी पार्टी की बात माने तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी अपनी सरकार बचाने के दौरान उनके खैवनहार बने जनप्रतिनिधियों के एक बुलावे पर चाहे वह कांग्रेस पार्टी से सीधे जुड़े हो या समर्थक हो के कहने पर उनकी विधानसभा में लगातार हाजीरी लगा रहे हैं। भाजपाइयों का मानना है कि जनविरोधी सरकार एक बार फिर से झूठें विकास के दावों के बीच राज्य में सत्तासीन होने का सपना संजो रही है। जबकि कि राज्य में अराजकता, गुंडागर्दी, चोरी- चकारी, बढ़ते आपराधिक मामलों ने आम जनता की नाक में दम कर रखा है। सरकार व जनप्रतिनिधियों की बेरुखी के चलते गौमाताएं तिल तिल कर मरने को मजबूर है। लेकिन कागजी कार्रवाई के अलावा धरातल पर गौ माता को जीवन दान देने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जबकी स्वयं मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से सहायता मांगते फिर रहें हैं। राज्य में सरकार की अकर्मण्यता व लापरवाही की वजह से अब तक डेढ़ से दो लाख गोवंश की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन सरकार अब जाकर चैती है। सरकार केवल भामाशाह एनजीओ व सामाजिक संगठनों के ऊपर ही पूरी तरह निर्भर बनी हुई है। शुद्ध पेयजल, विद्युत आपूर्ति , बेरोजगारी भत्ता , किसान कर्ज माफी और और सरकार द्वारा हर नाकामी पर केंद्र सरकार के ऊपर ठिकरा फोड़ने की आदत को लेकर जनता जनार्दन में गहरी नाराजगी व्याप्त है, जनविरोधी सरकार के चाल- चरित्र से अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी है। अब बात करें हमारे क्षेत्र की तो स्पष्ट और सीधी सी कहावत है..की "जनता जिसको चाहती है जीत उसी की होती है"..... क्योंकि विकास, तरक्की एवं जनसुविधाओं की उपलब्धता से परे भोली-भाली जनता जनप्रतिनिधियों/प्रत्याशियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को देखकर फैंसला करती है। नहीं मानो तो आगामी दिनों में इस बात को परख कर देखा जा सकता हैं।



