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कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्वैच्छिक संगठनों, सिविल सोसायटी तथा उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद को मुुख्यमंत्री ने किया संबोधित 
जयपुर/सवाई माधोपुर ( चन्द्रशेखर शर्मा)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्वैच्छिक संगठनों, सिविल सोसायटी तथा उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद को संबोधित किया। बजट को समावेशी एवं लोककल्याणकारी स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार सभी वर्गों के सुझाव ले रही है। इनके सुझावों के आधार पर हम ऐसा बजट लाएंगे जो प्रदेश के समग्र विकास को गति देने वाला हो।

राज्य के विकास में सभी वर्गों की सक्रिय एवं समान भागीदारी आवश्यक है। स्वैच्छिक संगठन तथा सिविल सोसायटी के सदस्य जमीनी स्तर पर काम कर जरूरतमंदों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह सुशासन देने में उनके सुझाव अत्यन्त उपयोगी हैं।

सामाजिक संगठनों ने पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, पोषण, पारदर्शिता, कचरा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा, नशा मुक्ति, उपभोक्ता हितों के संरक्षण, लैंगिक एवं सामाजिक समानता जैसे बुनियादी मुद्दों पर निरन्तर उपयोगी फीडबैक देने का काम किया है। इन सुझावों के आधार पर सरकार को गरीबों एवं जरूरतमंदों के कल्याण के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्धारण तथा जनहित में फैसले लेने में मदद मिलती है। 

यूपीए सरकार के दौरान देश में सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अधिकार आधारित युग की शुरूआत हुई। उस समय सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा और महात्मा गांधी नरेगा जैसे कानूनों को तैयार करने में स्वैच्छिक संगठनों के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारी सरकार ने भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर स्वैच्छिक संगठनों एवं सोशल एक्टिविस्टों के सुझावों को सदैव प्राथमिकता दी है। 

बैठक के दौरान एनजीओ, सोशल एक्टिविस्टों तथा उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों ने बजट को लेकर अपने सुझाव दिए। इन प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण से पूर्व सभी संबद्ध पक्षों (स्टेक होल्डर्स) के साथ संवाद करने की मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोविड प्रबंधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन तथा बजट निर्माण आदि से पूर्व सरकार ने इन संगठनों से सतत् संवाद की परम्परा को बनाए रखा है। इससे पारदर्शिता लाने एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती अपर्णा अरोरा ने बताया कि राज्य बजट को जनकेन्द्रित बनाने की दिशा में विभिन्न वर्गों के सुझाव लिए जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों तथा उपभोक्ता फोरम के प्रतिनिधियों के उपयोगी सुझावों को गत बजट में भी सम्मिलित किया गया था। बैठक में प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर उन्हें बजट प्रावधानों में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, नगरीय विकास मंत्री श्री शांति धारीवाल, चिकित्सा मंत्री श्री परसादीलाल मीणा, कृषि मंत्री श्री लालचन्द कटारिया, जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी, राजस्व मंत्री श्री रामलाल जाट, खान एवं पेट्रोलियम मंत्री श्री प्रमोद जैन भाया, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री श्री रमेश मीणा, उद्योग मंत्री श्रीमती शकुन्तला रावत, परिवहन राज्यमंत्री श्री बृजेन्द्र ओला, ऊर्जा राज्यमंत्री श्री भंवरसिंह भाटी सहित राज्य मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्य, मुख्य सचिव श्रीमती ऊषा शर्मा, प्रमुख शासन सचिव वित्त श्री अखिल अरोरा, आर्थिक सलाहकार श्री अरविन्द मायाराम, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ.गोविन्द शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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