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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के उपलक्ष्य पर वर्चुअल कार्यक्रम

सवाई माधोपुर/चन्द्रशेखर शर्मा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के उपलक्ष्य पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती के शुभ अवसर पर मुझे खुशी है, कि आज यह आयोजन किया गया, इसके लिए मैं बीडी कल्ला साहब को, अशोक चांदना जी को और मनीष शर्मा जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस का नाम आते ही पूरे देश के नौजवानों में एक नया जज्बा पैदा होता है, एक वो भाव पैदा होता है कि किस प्रकार से उस जमाने के एक महापुरुष ने वो करिश्मा कर दिखाया, अभी मेरे पूर्व वक्ता कह रहे थे कि विदेश की धरती पर जाकर उन्होंने आर्मी का गठन किया, उनकी हिम्मत और साहस की दाद देनी पड़ेगी। उस जमाने में आर्मी का गठन करना, आजाद हिंद फौज का भर्ती करना हमारे मुल्क के लोगों का और मुझे खुशी है कि उसके अंदर राजस्थान के भी सपूत सीकर के दांतारामगढ़ के पास घाटवां गांव के नाथूराम गुर्जर, गुलाबसिंह शेखावत, सवाई सिंह झुंझुनूं के बुडाना गांव के सेढूराम कृष्णिया जैसे फ्रीडम फाइटर्स ने आजाद हिंद फौज में शामिल होकर के राजस्थान का गौरव बढ़ाया। अभी कल्ला जी बता रहे थे कि किस प्रकार से उनका रिश्ता रहा है राजस्थान से भी, किस प्रकार से उनके शहीद होने के बावजूद भी यहां उनका नाम अमर रखने का प्रयास किया गया। बाकी बातें तो मेरे पूर्व वक्ताओं ने, कुमार प्रशांत जी ने सब बातें कहीं हैं और मैं समझता हूं कि उनका व्यक्तित्व इतना विराट था, उनका त्याग-बलिदान की कहानियां अलग-अलग तरह की हैं, किस प्रकार उन्होंने ज्वाइन नहीं किया आईसीएस सर्विसेज को, सिर्फ इसलिए कि मुझे देश की आजादी की जंग में हिस्सा लेना है। गांधी जी से प्रभावित होकर वे आजादी की जंग में कूद पड़े थे और जिस प्रकार से उन्होंने जिंदगी बिताई और जिस प्रकार से जेलों में बंद रहे, एक लम्बा इतिहास बना दिया उन्होंने और यह बात हम लोग बचपन से सुनते आ रहे हैं कि गांधी जी, नेहरु जी, सुभाषचंद्र बोस जी में मतभेद थे और अगर आप उनके इतिहास पढ़ें, तो आपको और नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की बात है, प्रेरणा लें कि हम लोग किस प्रकार उस वक्त के महान नेताओं में मतभेद होते थे, पर मन में भेद नहीं होते थे, चाहे वो पंडित नेहरू थे, सरदार वल्लभ भाई पटेल भी क्यों नहीं हों। ये जो किस्से कहानी बोलते हैं, मुझे बड़ा तरस आता है इनके ऊपर कि ये विपक्ष के लोग, ये आरएसएस और बीजेपी के लोग, ये अपराधबोध से ग्रसित हैं, गिल्टी कॉन्शियस हैं ये क्योंकि इनकी कोई भूमिका रही नहीं है, न आजादी की जंग में, न आजादी के आंदोलन के अंदर, न त्याग, न बलिदान, न कुर्बानी, एक व्यक्ति जेल नहीं गया इनका, एक व्यक्ति जेल नहीं गया, बल्कि आजादी के वक्त में जब ये लड़ाई चल रही थी, संघर्ष चल रहा था अंग्रेजों के खिलाफ में, तब कई बार तो वीर सावरकर के बारे में कहते हैं कि उन्होंने तो अंग्रेजों के भर्ती प्रारंभ की यहां पर सैनिकों की, तो आज इतने अपराधबोध से ग्रसित हैं कि इनके पास और कोई बात है ही नहीं। कभी गांधी को इन्होंने स्वीकार नहीं किया था, आज भी देखिए आप इनके लोग गोडसे को पूजा करने लग गए, मूर्ति लगाने लग गए। इनको क्या अधिकार है देश के नौजवानों को ग़ुमराह करने का? ये पूरे देश को गुमराह करते रहते हैं। इतिहास तो ये जानते हो कि तोड़ना मरोड़ना जानते हैं, अमर जवान ज्योति हटा दी, आप समझ सकते हो, एक-एक इनके फैसले इनके इसलिए हैं कि पिछली उपलब्धियों को समाप्त कैसे करें। 70 साल में कुछ नहीं हुआ, यह जो कुछ देश बना है वो आज विज्ञान, तकनीकी, यह सब 7 साल में बना है। जिस रूप में इनके रवैये हैं, वो देशहित में नहीं हैं। 

आज देश को जरूरत है शांति, भाईचारा, प्यार, मोहब्बत, सद्भावना का माहौल आपस के अंदर, चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो, पारसी, जैन हो, उस भावना से ही हम लोग इस देश को मजबूत बना सकते हैं, एक व अखंड रख सकते हैं और इस भावना से ही हम इस मुल्क को विकास और विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। जहां शांति है, वहां विकास होता है और वो ही मुल्क आगे बढ़ता है, वो गांव हो, चाहे वो परिवार ही क्यों न हो, जहां अशांति होती है, वो झगड़े में पीछे रह जाते हैं और नई पीढ़ी को गुमराह करने का क्या अधिकार है इनको? अगर आप देखें कि जब पंडित नेहरू जेल में थे, उनकी पत्नी कमला नेहरू खुद फ्रीडम फाइटर थीं, वो बीमार हो गईं, टीबी हो गई उनको तो सुभाष चंद्र बोस लेकर उनको जर्मनी गए, उनका इलाज करवाया, उनके साथ रुके, जब तक कि पंडित नेहरू जेल से छूटकर नहीं आ गए वहां पर। कितने किस्से कहानी उनके यहां हैं, पंडित नेहरू उनके घर रुकते थे। जब फॉरवर्ड ब्लॉक बना दी उन्होंने, अलग से पार्टी बना दी अपनी, तब भी उनके घर रुकते थे। राष्ट्रपिता की उपाधि भी सुभाषचंद्र बोस ने ही दी। अभी कुमार प्रशांत जी कह रहे थे कि जय हिंद का नारा, जय हिंद बोलते ही मन में देश के लिए गर्व की अनुभूति होती है और पंडित नेहरू ने उनको याद करने के लिए ही तो नारा लगाया था जय हिंद का। इंदिरा गांधी को हमने जय हिंद बोलते हुए देखा, हर कांग्रेस नेता जय हिंद बोलता है। यह आरएसएस वाले क्या बोलते हैं? यह तिरंगा झंडा नहीं लगाते हैं अपने हैडक्वार्टर पर। आप कल्पना करो, तिरंगे झंडे को ही स्वीकार नहीं करते थे ये, अब जाकर स्वीकार करने लगे हैं ये, अब गांधी को मानने लगे हैं। हर हस्ती देश में महापुरुष के रूप में हुई है, उनके त्याग, बलिदान की कहानियां बहुत ही मार्मिक हैं, प्रेरणा देने वाली हैं। दुर्भाग्य से आज जो लोकतंत्र की बात हम करें, लोकतंत्र में सबसे बड़ी टॉलरेंस पावर चाहिए, लोकतंत्र के मायने ही यही हैं कि किस प्रकार से आप अपने असहमति रखने वाले व्यक्ति का भी मान-सम्मान करें, उनकी भावना की इज्जत करें, अपनी आलोचना करने वालों को भी आप ध्यान से सुनें उनकी बात को। आज तो असहमति व्यक्त करने वाले तो देशद्रोही बन जाते हैं, कितने साहित्यकार, पत्रकार जेलों में बंद रहे हैं, कोई सोच सकता है? खाली मूर्ति लगा दो आप सुभाषचंद्र बोस की, उससे काम नहीं चलता है, यह तो आपका दिखावा है, विचारधारा की बात करो आप तो। सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा क्या थी? वो ही थी जो आज कांग्रेस की, चाहे वो संविधान में लोकतंत्र की बात की गई, या समाजवाद की बात की जाती है, धर्म निरपेक्षता की बात की जाती है, हिंदू-मुस्लिम की बात की जाती थी, तो सुभाष चंद्र बोस उसके पक्षधर थे। रास्ते अलग हो सकते हैं, गरम दल और नरम दल तो कांग्रेस के अंदर ही हुआ करते थे, परंतु आज किस प्रकार यह मुल्क में लंबी लड़ाई लड़कर मुल्क को आजाद करवाया महात्मा गांधी के नेतृत्व में, गोपाल कृष्ण गोखले हों, चाहे लोकमान्य तिलक हों, फिरोज शाह मेहता हों, बड़ी-बड़ी हस्तियां थीं उस जमाने के अंदर, लंबी फेहरिस्त है उनकी। पंडित जवाहर लाल नेहरू थे, मौलाना अबुल कलाम आजाद थे, सरदार वल्लभ भाई पटेल थे, डॉ. अंबेडकर ने संविधान बनाया, तो अंबेडकर साहब कौनसे कांग्रेस में थे वो? आप कल्पना कीजिए उस वक्त में, फिर भी उनको लॉ मिनिस्टर बनाया गया, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक थे, वो मंत्री बने नेहरू कैबिनेट के अंदर, ऐसे ही बन गए? क्या जमाना था जहां मतभेद होना अलग बात है, परंतु मन में भेद नहीं हो और देशहित के लिए हम सब एक हैं, वो भावना हुआ करती थी और आज क्या हो रहा है, आज क्या हो रहा है, आज चारों ओर तनाव का, हिंसा का माहौल है देश के अंदर, लोकतंत्र खतरे में ऐसा महसूस होता है। इतने आर्टिकल आते हैं आप देखें तो, लिखने वाले साहित्यकार, लेखक भी थक गए, धीरे-धीरे थकते जा रहे हैं, बहुत ही चिंताजनक बात है यह। इस देश का लेखक हो, साहित्यकार हो, पत्रकार हो, जिसकी लेखनी में ताकत है, वो मुल्क की दिशा तय करते हैं, वो थकते जा रहे हैं आज, कितना लिखेंगे? इसलिए आज जब 125वीं जयंती मना रहे हैं सुभाष चंद्र बोस की, तो मैं कहने को तो बहुत सारी बातें हैं, कहने को तो कोई भी कह सकता है, वो भी कम पड़ेंगी, पर मैं समझता हूं कि, मैं तो वहां मणिपुर में भी गया हूं जहां इनका स्मारक बना हुआ है बॉर्डर पर, पर मैं कहना चाहूंगा इस मौके पर कि ये ऐसे मौके आते हैं कि जब हम लोग चिंतन करें, मनन करें कि सच्चाई क्या है? इतिहास पढ़ें और नई पीढ़ी को ग़ुमराह होने से बचाएं। इसलिए मैंने कहा कि ये खुद अपराधबोध से ग्रसित हैं, इसलिए यह सच्चाई तो सामने आने देना नहीं चाहते हैं, उसके बजाय ग़ुमराह करो आप, ध्यान डायवर्ट कर दो आप कि साहब मतभेद थे, अरे क्या उस जमाने में क्या बातें होती थीं, कैसा भावना होती थी, सब उद्देश्य एक होते थे, कैसे हम आजाद करवाएं मुल्क को, रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, वो भावना होती थी। इसलिए मैं यह कहना चाहूंगा नई पीढ़ी के हमारे नौजवानों को कि आने वाला कल आपका है, देश के कर्णधार आप हैं, आपको सच्चाई में, सत्य में, अहिंसा में और जो भावना है प्रेम की, मोहब्बत की, भाईचारे की, जिससे समाज मजबूत बनता है, एकजुट रहता है, उसको अपनाकर आपको आगे बढ़ना पड़ेगा, यह धर्म और जाति के नाम पर जो राजनीति चल रही है, दुर्भाग्य है कि आज 70 साल के बाद में भी, 75 साल के बाद में भी आज भी धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करके लोग सत्ता में आते हैं। अरे लड़ाई करो विचारधारा की, उसमें किसी को कोई ऐतराज नही हो सकता है, विचारधारा तो आरएसएस बीजेपी की भी हो सकती है अपनी, हमें ऐतराज नहीं है उसके अंदर, आप अपनी बात कहो, हम अपनी बात कहें, जनता फैसला करे। मगर आप लोगों को भड़काओगे धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर, लोग ग़ुमराह होंगे क्योंकि धर्म और जाति ऐसी चीज है कि ग़ुमराह होने में वक्त नहीं लगता है। यह देश अनेकता में एकता वाला मुल्क है, इसमें तो मैं समझता हूं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि हम आने वाले वक्त के अंदर किस प्रकार से उनका जो रास्ता था, जो उन्होंने तय किया था, वो उस वक्त की बात थी जब देश को गुलामी की जंजीरों मुक्त करवाना था। उन्होंने आर्मी बनाई, गांधी ने अहिंसा की बात की देश को जोड़ने के लिए, अलग-अलग रास्ते थे, उद्देश्य एक था। मान-सम्मान के हिसाब से आपस में प्रेम भाव रखते थे उस जमाने के लोग। जो आज माहौल बना है देश के अंदर नई पीढ़ी को समझना पड़ेगा, सोचना पड़ेगा, अध्ययन करें वो लोग, इतिहास की पुस्तकों को पढ़ें, सच्चाई को सामने रखें और अपने जीवन को कामयाब करें। मानव संसाधन ऐसा बने देश के अंदर, जो देश के काम आए। हमारी महान संस्कृति, संस्कार, परंपराएं महान हैं देश की, उसको अपनाएं, बजाए इसके कि हम लोग जातिवाद और धर्म के नाम पर ही एक-दूसरे के खिलाफ में महौल बनाते रहेंगे, तो यह देशहित में नहीं है। मुझे खुशी है कि मनीष शर्मा जी ने कॉर्डिनेट करके इस प्रोग्राम को आयोजित किया, उनको मैं धन्यवाद देता हूं और तमाम साथी जो हमारे बैठे हुए हैं, उन सबको मेरा बहुत बहुत धन्यवाद। 

लास्ट में मैं कहना चाहूंगा कोरोना जो है, यह अभी गया नहीं है। ओमिक्रॉन दूसरी वेव में जो हालात थे डेल्टा के, वैसा नहीं है। इसलिए हम लोग लापरवाह हो रहे हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं, डिस्टेंसिंग मेंटेन नहीं कर रहे हैं, तेज गति से फैल रहा है ओमिक्रॉन भी, पर जो पोस्ट कोविड प्रॉब्लम होती है, वो दूसरी लहर में बहुत भयंकर हुई थी, किसी को हार्ट, किसी को लंग्स, किसी को अस्थमा, किसी को किडनी, किसी को पैरालाइटिक अटैक, तो यह बहुत खतरनाक महामारी है यह और अभी भी मैं यह कहना चाहूंगा कि जो ओमिक्रॉन है इसके पोस्ट कोविड क्या असर पड़ेंगे, वो तो आने वाला वक्त बताएगा, अभी बहुत ही तेज गति से फैलता है, संक्रमित करता है व्यक्ति को, पूरा परिवार के परिवार आ रहे हैं, परंतु फॉर्च्युनेटली ऑक्सीजन की और जो पहले हॉस्पिटल की मांग हुआ करती थी आईसीयू बेड की, वो स्थिति इस बार नहीं है क्योंकि यह लंग्स तक नहीं पहुंच पा रहा है, खांसी, जुकाम और बुखार तक ही सीमित रहता है। पांच-चार दिन में ठीक भी हो जाते हैं कई लोग। इसलिए भारत सरकार भी कह रही है कि आप पांच दिन के बाद तो वापस टैस्ट करवाओ भी मत। तो कोई घबराने की बात तो नहीं है. पर सावचेत रहने की बात है, सावचेत नहीं रखेंगे तो यह फैलता जाएगा, फैलता जाएगा, तो पता नहीं यह अपने नए रूप  में भी आ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब बहुत ज्यादा तेजी से यह फैलता है, तो नया म्यूटेंट बन जाता है। हो सकता है वो खतरनाक हो, कोई कुछ ही नहीं कह सकता। 

आज अमेरिका में 10-10 लाख लोग प्रतिदिन आ रहे हैं, हॉस्पिटल भरे पड़े हैं वहां पर, जो इंडिया में हमारे देश में यह स्थिति नहीं है। जर्मनी की स्थिति अलग है, इंग्लैंड की अलग स्थिति है, इटली की अलग है, स्पेन की अलग है। तो हमें ध्यान देना पड़ेगा और आप जितने लोग जुड़े हुए हैं, उन सबसे मेरा विनम्र निवेदन है कि आप कम से कम क्योंकि आप जुड़े हुए लोग प्रभावशाली लोग हैं, समाज आपका मान-सम्मान करता है, आपकी बात का वजन है, जहां संभव हो आप इस बात का एक मैसेज दें कि किस प्रकार से आपको कोरोना से बचाव करके चलना पड़ेगा और कम से कम एटलीस्ट मास्क लगाएं। मैं उम्मीद करता हूं कि जो लड़ाई आप सबके आशीर्वाद से लड़ी गई राजस्थान में, कोविड जंग लड़ी गई, उसमें राजस्थान का मान-सम्मान पूरे देश में, दुनिया में बढ़ा, भीलवाडा मॉडल भी हुआ। मैं उम्मीद करता हूं कि यह जंग हम जीतेंगे और वैक्सीनेशन भी शानदार हुआ राजस्थान के अंदर और देश के अंदर, वैक्सीनेशन के कारण ही बचाव हुआ है। यह जो हॉस्पिटल में भर्ती नहीं हो पा रहे हैं, उसका कारण ही यह है कि वैक्सीनेशन के कारण से मृत्युदर बहुत कम हो गई है, वैक्सीन बचा रही है दुनिया को, देश को। वैक्सीन का अभियान पूरा करवाएं आप लोग। 15 साल तक के बच्चों के वैक्सीन के भारत सरकार ने अभी छूट दी है, हम लोगों ने काफी दबाव दिया, मांग की हम लोगों ने कि 12 साल के बच्चे भी हों, 5 साल तक के बच्चों को क्यों नहीं लें क्योंकि कई मुल्कों में दो साल तक के बच्चों को भी होने लग गई वैक्सीनेशन। हमारी सरकार की भारत सरकार की तैयारी होनी चाहिए कि वो अभी से ही दो साल, पांच साल, दस साल तक की तैयारी करे, जिससे कि चौथी लहर भी आ जाए, तो कोई तकलीफ नहीं आए। अभी तीसरी लहर में तकलीफ नहीं आई क्योंकि हमने वैक्सीनेशन अच्छा करवा दिया। ये तमाम बातें जो हैं जनता के सहयोग से ही पूरी होंगी, खाली सरकारी मशीनरी अकेली कुछ नहीं कर सकती। बाकी तो हमारे प्रदेश के अंदर भी डॉक्टर्स हों, नर्सेज हों, जितने भी आशा सहयोगिनी हों, आंगनवाड़ी वर्कर्स हों, हर विभाग के कर्मचारी हों, पुलिस कान्स्टेबल भी क्यों नहीं हों, सबने धर्मगुरुओं ने, एनजीओ ने, एक्टिविस्ट ने, पॉलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने, सबने मिलकर लड़ाई लड़ी। हमने कहा कि कोई भूखा नहीं सोना चाहिए, तो मुझे खुशी है कि पहली लहर के अंदर भी जो लॉकडाउन हो गया था, तो सबने एक दूसरे की मदद की, एनजीओ ने भी की, दूसरों ने भी की और समय निकल गया, सरकार भी पूरी तरह से साथ खड़ी रही उन लोगों के। इसलिए मैं आपको कहना चाहूंगा इस कोरोना जंग के अंदर भी ध्यान रखें और आप सब लोग जुड़े इस वीसी से इस बात की मुझे बहुत प्रसन्नता है। यही बात कहते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं, धन्यवाद, जय हिंद।


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