किशनगढ़।वर्षा योग समिति के तत्वाधान एवम आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगलवार को वात्सल्य रत्नाकार आचार्य विमल सागर महाराज का 108वा जन्म जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ रतनलाल, मनीष कुमार, आशीष कुमार बड़जात्या, धांधोली वाले, सुशील पाटनी विजयनगर, मयंक संकेसरा मुंबई ने चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलित करके किया। वर्षायोग समिति के प्रचार प्रसार प्रभारी संजय जैन ने बताया कि आचार्य सुनील सागर महाराज के पाद प्रक्षालन करने के बाद वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागर महाराज की संगीतमय पूजन की गई। जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से अर्घ्य समर्पित किए। आचार्य सुनील सागर महाराज ने सन्मति समवशरण में मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि मुनियों के 108 गुण होते हैं इसलिए 108 का अंक मुनियों के लिए बहुत महत्व होता है। आचार्य विमल सागर महाराज ने जीवन में खूब वत्सलय बाटा। आचार्यश्री ने कहा कि लड़ाई की जड़ हंसी एवं बीमारी की जड़ खांसी होती है। जीवन में किसी का मजाक नहीं बनना चाहिए। साधक कभी अपने स्वार्थ के लिए कुछ नहीं करते हैं। तपस्वियों का उपचार कम उनकी एनर्जी ज्यादा काम करती है। आम आदमी व तपस्वियों के वचनों में काफी फर्क होता है। इंसान को अपनी समस्या पहाड़ और दूसरों की समस्या छोटी नजर आती है। तप, तपस्या करने से दुख दूर होते हैं। जीवन में सदैव धर्म से जुड़े रहना चाहिए। समय को व्यस्त नहीं घमाना चाहिए। श्रद्धा से दिया गया पानी भी दूध के समान काम करता है। मोक्ष मार्ग में सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चारित्र का बहुत महत्व होता है। जिसे निज आत्मा का रस आने पर बाहर के रस बेकार लगते हैं। आचार्यश्री ने आचार्य रत्नाकर विमल सागर महाराज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया। दोपहर में सामयिक, स्वाध्याय, शाम को पण्य पुच्छा एवम आरती की गई। इस दौरान अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

