हर्षोल्लास एवं बड़ी धूमधाम से मनाया गया गोवर्धन पूजन व अन्नकूट महोत्सव मलारना डूंगर/सवाई माधोपुर (चन्द्रशेखर शर्मा)। जिले भर में पिछले पांच दिनों से उत्सवों की शृंखला मनाई जा रही है। धन-त्रयोदशी(धन तेरस), हनुमान चतुर्दशी(छोटी दीपावली) एव दें दीपावली(लक्ष्मी पूजन) के बाद बुधवार को श्री गोवर्धन पूजन तथा अन्नकूट उत्सव भी बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। दोज- पूजन के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का भी विधिवत समापन हुआ। इसी श्रृंखला में मलारना चौड़ कस्बे में पूर्विया मौहल्ला स्थित श्री लक्ष्मी नारायण एवं गोपीनाथ मंदिर में पंडितों द्वारा वैदिक पूजाविधि से गोवर्धन जी का पूजन करवाया गया और अन्न कूट महाप्रसादी वितरित की गई। भारत की प्राचीन सनातन परंपरा में गोवर्धन पूजा का बड़ा महत्त्व है। भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा की थी। तबसे गोवर्धन जी की पूजा प्रचलित हुई। भगवान की शरणागति के साथ प्रकृति के प्रति प्रेम का भी यह अनुपम उदाहरण है। समग्र विश्व में यह उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। भारतीय सनातन संस्कृति और धर्म के वैश्विक प्रचारक परम पूज्य संतों की प्रेरणा से जिले भर के सभी मंदिरों में यह उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया गया ।
हर्षोल्लास एवं बड़ी धूमधाम से मनाया गया गोवर्धन पूजन व अन्नकूट महोत्सव मलारना डूंगर/सवाई माधोपुर (चन्द्रशेखर शर्मा)। जिले भर में पिछले पांच दिनों से उत्सवों की शृंखला मनाई जा रही है। धन-त्रयोदशी(धन तेरस), हनुमान चतुर्दशी(छोटी दीपावली) एव दें दीपावली(लक्ष्मी पूजन) के बाद बुधवार को श्री गोवर्धन पूजन तथा अन्नकूट उत्सव भी बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। दोज- पूजन के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का भी विधिवत समापन हुआ। इसी श्रृंखला में मलारना चौड़ कस्बे में पूर्विया मौहल्ला स्थित श्री लक्ष्मी नारायण एवं गोपीनाथ मंदिर में पंडितों द्वारा वैदिक पूजाविधि से गोवर्धन जी का पूजन करवाया गया और अन्न कूट महाप्रसादी वितरित की गई। भारत की प्राचीन सनातन परंपरा में गोवर्धन पूजा का बड़ा महत्त्व है। भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा की थी। तबसे गोवर्धन जी की पूजा प्रचलित हुई। भगवान की शरणागति के साथ प्रकृति के प्रति प्रेम का भी यह अनुपम उदाहरण है। समग्र विश्व में यह उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। भारतीय सनातन संस्कृति और धर्म के वैश्विक प्रचारक परम पूज्य संतों की प्रेरणा से जिले भर के सभी मंदिरों में यह उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया गया ।


