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 MAATI KI MAHAK NEWS
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माटी की महक किशनगढ़।आचार्य सुनील सागर वर्षायोग समिति के तत्वावधान एवम आचार्य सुनील सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में पर्युषण पर्व के दौरान 32, 16, व 10 उपवास करने वाले तपस्वियों की शोभायात्रा बुधवार को निकाली गई। शोभायात्रा सुबह जैन भवन से शुरू हुई। बग्गियों में तवस्वियो को बैठाकर बैंड बाजों के साथ शुरू हुई शोभायात्रा में सिटी रोड, मुनिसुव्रतनाथ मंदिर, मैन चौराहा, मिल चौराहा होते हुए आर. के. कम्युनिटी सेंटर पहुंची। रास्ते में जगह जगह तपस्वियों का लोगो ने स्वागत किया। बैंड की मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु नाचते गाते हुए चल रहे थे। आर. के. कम्युनिटी सेंटर में सभी तपस्वियों ने आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ से आशीर्वाद लिया। इसके बाद 10 उपवास करने वालो तपस्वियों का सामूहिक पारणा करवाया गया। 32 व 16 उपवास करने वाले तपस्वियों का सामूहिक पारणा गुरुवार को होगा। इससे पूर्व सन्मति समवशरण में तपस्वियों ने अभिषेक व शांतिधारा की। शांतिधारा करने का सौभाग्य ओम प्रकाश, मोहित गदिया को मिला। भक्ति भाव से पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए। आर.के. कम्युनिटी सेंटर में आयोजित धर्मसभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेट करने का सौभाग्य पदम पदमचंद पुनीत पांडे कुशलगढ़ सांगानेर को मिला। आचार्य सुनील सागर महाराज ने धर्मोपदेश देते हुए कहा कि कुछ कर गुजरने के लिए उपवास नहीं, मन चाहिए। साधन सभी जुड़ जायेंगे केवल संकल्प रूपी धन चाहिए। स्वस्थ, सुखी, संतोषी जीवन तप से संभव है। हम जिसे खाते हैं उसके बजाय हमको खाने वाले क्रोध, चिंता, वासना ज्यादा नुकसानदायक है। दूसरों को देखने के बजाय स्वयं के चेतन की झलक देखने पर बेड़ा पार हो जाएगा। दीपक भवन को जगमगा देता है वैसे ही तपस्या आत्मा को जगमगा देती है। तप से आत्मा शुद्ध होती है। उपवास आत्म शुद्धि, निर्मलता बढ़ाने एवम जिन धर्म की प्रभावना के लिए होता है। देश को तप व त्याग करने वालों ने संभाल रखा है। कषाय, विषय का त्याग करना चाहिए। अशांति को रोकने के लिए तप करना चाहिए। तप तो स्वयं को तपाकर प्राप्त किया जाता है। गुरुकुल व संयुक्त परिवार की परंपरा से जैन धर्म व संस्कृति सुरक्षित रहेगी। आचार्यश्री ने जीवन में छोटे-छोटे व्रत, उपवास करके जीवन को सार्थक करते हुए धर्म प्रभावना करने का आशीर्वाद दिया। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र वाचन हुआ। प्रचार प्रसार प्रभारी संजय जैन ने बताया कि शाम को प्रतिक्रमण के बाद, गुरू वंदना, पण्ह पुच्छा व मंगल आरती की गई।

क्षमावाणी पर्व

सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान एवम आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी पर्व 19 सितंबर शाम को 5.45 बजे मनाया जाएगा। दोपहर में सभी दिगंबर जैन मंदिरों में श्रीजी की विशेष पूजा अर्चना के बाद कलशाभिषेक होंगे। इसके बाद  5.45 बजे से रविंद्र रंगमंच पर सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जायेगा।

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