सगुण और निर्गुण भक्ति धारा का अदभुत संगम श्री दुर्गा माता एवं सर्वोदय वेद विद्या मंदिर (श्री आत्मानंद वैदिक गुरुकुल) मलारना चौड़
आलेख: चन्द्रशेखर शर्मा
सवाई माधोपुर जिले के मलारना डूंगर उपखण्ड क्षेत्र अंतर्गत लालसोट - कोटा मेगा हाइवे पर अवस्थित मलारना चौड़ कस्बा जहां राजनैतिक दृष्टि कोण से गौरवशाली इतिहास को अपने आप में समेटे हुए है। वहीं आध्यात्मिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से भी इसका अपना एक अलग प्रभाव है, या यूं कहें कि धार्मिक रूप से इसका महत्वपूर्ण स्थान है। अगर इसे देव नगरी या देवभूमि की संज्ञा से नवाजा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि मलारना चौड़ कस्बा सगुण और निर्गुण भक्ति धारा का एक अदभुत और अनोखा संगम है। श्रृद्धा, भक्ति एवं विश्वास की अविरल धारा को यहां एकसमान रूप से बहते हुए हमेशा देखा जा सकता है।विशेषकर जब पर्व, उत्सव एवं त्यौहारों का खास आयोजन हो तो यहां का भक्ति मय वातावरण अपने चरमोत्कर्ष पर होता है। आपको बता दें, कि एक ओर जहां मलारना चौड़ कस्बे में स्थित श्री दुर्गा माता का मंदिर साकार ब्रह्म को मानने वाले श्रृद्धालुओं के लिए सगुण भक्ति धारा का एक अनोखा और प्रमुख आस्था का केन्द्र है, वहीं आत्मानंद वैदिक गुरुकुल मन्दिर भी निर्गुण धारा के उपासकों की प्रमुख कर्मस्थली है। दोनों ही मंदिरों की ख्याति सुदूरवर्ती क्षेत्रों में फैली हुई है । इसलिए यहां त्यौहार के मौसम में तो श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ता हुआ दिखाई पड़ता है। ओर तो ओर गढ़ स्थित श्री गोविंद देव मंदिर जहां ऐतिहासिक विरासत का एक हिस्सा है वहीं श्री बाबा रामदेव मन्दिर (श्री सांई बाबा आश्रम) मलारना चौड़ भी चमत्कारी मंदिर के रूप में दीन दुखियों की पीड़ा हरने का एक मात्र ख्याति प्राप्त स्थान है। जहां रजवाड़ो के समय में बना गोविंददेव जी का मंदिर व उसमें लगे शिलालेख उसकी प्राचीनता के कहानी बंया करते है। वहीं दुर्गा सागर बांध ( तालाब) के सुरम्य वातावरण में अवस्थित भव्य श्री दुर्गा माता का मंदिर व उसमें विराजमान स्वयंभू प्रतिमा का अकारण ही लोगों का ध्यान आकर्षित करती है तो संगमरमर से नवनिर्मित ऊंचे ऊंचे गुंबद भी मन्दिर की ख्याति एवं महिमा का बखान करते हुए प्रतीत होते हैं।
दुर्गा माताजी मंदिर का इतिहास
मरमट गोत्र के मीणाओं के जागाओं के मन्तव्यों के अनुसार अगर हम बात करें तो मलारना चौड़ कस्बे की नींव विक्रम सवंत 801 में अक्षय तृतीया के दिन मल्ला मरमट व चरड़ा चौधरी द्वारा डाली गई थी, या यूं कहें कि मलारना चौड़ कस्बा उनके परस्पर योगदान व सहयोग से बसाया गया था।
किंवदंती एवं पौराणिक मान्यता है, कि माताजी की स्वयम्भू प्रतीमा पहले से यहां विराजमान थी, उसी के बाद कस्बा मलारना चौड़ बसाया गया था। इस तथ्य पर गौर फरमाएं तो यह माना जाएगा कि माताजी यहां लगभग 1300 वर्ष पूर्व अपने आप(स्वयं भू रूप में) प्रकट हुई थी। यही नहीं तालाब के दूसरे सिरे (तीर पर) पर स्थित शिवालय में विराजमान मान श्री नीलकंठ महादेव के लिंग का प्रारूप भी स्वयंभू जान पड़ता है। और ऐसी मान्यता भी है। कहा जाता है ,कि रजवाड़ो के समय में ही दुर्गा माता के मन्दिर को नया स्वरूप (जीर्णोद्धार कार्य)मिला। गांव के बड़े बुजुर्ग एवं पंच पटेल तथा बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि रजवाड़ो के काल में जयपुर राज्य से माताजी मंदिर के रखरखाव हेतु कुछ धनराशि भी आती रही है। एक और किवदंती है, कि पूर्व में निवाई(जिला टोंक) एवं पीपल्दा(सवाई माधोपुर) रियासत के अधिन मलारना चौड़ कस्बा एक घने जंगल के रूप में अवस्थित था, जिसमें दो शेर भी रहते थे। कालांतर में उनका क्या हुआ यह सही से ज्ञात नहीं है। लेकिन यह माना जाता रहा है कि माताजी की के मंदिर में दो शेर भी रहते थे जिन्हें अब पाषाण प्रतिमा के रूप में मन्दिर के अन्दर गर्भ गृह के मुख्य द्वार पर प्रतिमा के रूप में लगाया गया है।
श्रीदुर्गा माताजी के चमत्कार व रहस्य
श्री दुर्गा माता के प्राकट्य से लेकर आज दिनांक तक अखंड ज्योति माता के मंदिर में अनवरत रूप से तथा अबाध गति से प्रज्ववलित होती आ रही है। आमजन द्वारा मन्दिर में ज्योति के लिए शुद्ध देशी घी व्यवस्था की जाती रही है और की जा रही है। कई बार विशेष आपदाओं के समय यथा-अतिवृष्टि आदि के अवसर पर गांव व ग्रामवासियों पर खतरे के बादल मंडराये तो माताजी के मन्दिर में विशेष आराधना कर शंखनाद किया गया, जिसके फलस्वरूप आपदा टलती हुई नजर आई या यूं कहें कि उसका कस्बे पर गलत असर नहीं हुआ भले ही आसपास के भीतर नुकसान हुआ हो। ऐसे अवसर सैकड़ों बार आये जब आस-पास के गांवों में ओले पड़े, टिड्डी दल आए, लेकिन मलारना चौड़ की सीमा में कोई हानी या नुकसान कभी नहीं हुआ यहां तक कि पशुधन व फसलें भी माता के आशीर्वाद व कृपा से सुरक्षित रही। कई मर्तबा अनावृष्टि के समय में या अनिष्ट की आंशका के चलते पूरे कस्बे से धन उगाही कर माताजी के लिए विशेष भोग तैयार कर चंढाया गया है। जिसके चलते माताजी के आशीर्वाद से गांव में अच्छी बारिश की प्रबल संभावनाएं तक बनी है और बारिश भी हुई है।
विशेष रीति- रिवाज
रबी की फसल काटने के बाद माताजी के छाबड़ी चढ़ाने का विशेष रिवाज है। भक्तगण हर बड़ी नवमी को माताजी का उपवास रखकर विशेष पूजा- अर्चना करते हैं। विवाह से पूर्व एवं विवाह संपन्न होने के बाद नवविवाहित जोड़े मन्दिर में मत्था टेकने के लिए जरूर पहुंचते हैं। दीपावली पर भी विशिष्ट कार्य संपादित होते हैं। विशेष कर दोनों ही नवरात्रों में माताजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जिमसें माता के श्रृंगार से लेकर, मंदिर परिसर की भव्य सजावट, भजन संध्या , अनुष्ठान, भजन- कीर्तन, यज्ञ हवन का आयोजन तथा भोग-प्रसादी का चढ़ावा वितरण मुख्य रूप से मन्दिर गतिविधियों में शामिल हैं। नवरात्रि काल में भक्तगण कनक दंडवत लगाकर मनोतियां माँगते है। माताजी के मन्दिर की ख्याति आसपास ही नहीं वरन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी फैली हुई है, इसलिए आस पास के जिलों के अलावा सम्पूर्ण राज्य एवं अन्य प्रदेशों (हैदराबाद , मालवा, महाराष्ट्र आदि) से भी श्रृद्धालु यहां विशेष अवसरों पर भारी संख्या में माता के दरबार में मत्था टेकने,दर्शन करने एवं हाजरी लगाने आते हैं। विगत कुछ वर्षों में ही आमजन के सहयोग से माताजी के मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण हुआ है, जिसकी भव्यता ऊंचे-ऊंचे गुम्बदों को देखते ही बनती है। अभी दुर्गा माता की सेवा में बतौर सेवक जसराम मीना (सेवानीवृत्त पंचायत प्रसार अधिकारी) व विशेष अवसरों पर प्रेरक एवं मार्गदर्शक पं. कृष्ण चन्द्र शर्मा ( साहित्य रत्न) द्वारा अन्य भक्तों की सहायता व सहयोग से सेवा धर्म का दायित्व बखूबी निभाया जा रहा है। जो कि काबिले तारीफ है।
प्रमुख भक्त व सेवक
माताजी के पहले भक्त लोग मल्ला मरमट को ही मानते रहे हैं । उसके बाद बात करें तो प्रमुख भक्तों में माताजी के अनन्य भक्त एवं भक्तशिरोमणि नानकराम मीणा (भगत बाबा) की बारी आती है, जिसने 1974 से लेकर 20 दिसम्बर 2020 तक लगभग 5 दशकों तक माताजी की तन मन धन व पूर्ण समर्पित भाव से सच्ची सेवा की है। कहा तो यह भी जाता है, कि अपनी सेवा के लिये माताजी ने स्वयं इन्हें चुना था। शिक्षक एवं शोधकर्ता विक्रम मीणा जो की भगत जी के परिवार से ताल्लुक रखते हैं ने बताया कि ये माताजी की सेवा के कारण जीवन भर ब्रह्मचारी रहे। इन्होंने अपना जीवन तो माता की सेवा में अर्पण किया ही साथ ही अपने जीते-जी ये अपना सब कुछ ( जमा धन-दौलत) माताजी की सेवा में ही अर्पण कर गए। शारदीय नवरात्र के चलते इन दिनों दुर्गा माता के मंदिर को विशेष साज सज्जा कर रोशनी से सजाया गया है, भजन संकीर्तन एवं माता के जयकारों की गूंज यहां अलसुबह व सायं काल तथा रात्रि काल तक गुंजायमान होती हुई सुनाई देती है। नित्य- प्रतिदिन माता के दर्शनार्थ सैकड़ों भक्तों का सैलाब यहां उमड़ रहा है। जिसमें पुरुषों की अपेक्षा महिला एवं बच्चों की संख्या अधिक नजर आती है।
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| (सर्वोदय वेद विद्या मंदिर) |
अब बात करें निराकार ब्रह्म के उपासक भक्तों के साधना केंद्र की तो, कस्बे में ही राम सागर बांध ( तालाब) की तलहटी के सुरम्य वातावरण में मौजूद स्वामी आत्मानंद वैदिक गुरुकुल (सर्वोदय वेद विद्या मंदिर आश्रम) की तो नवरात्रि के चलते यहां भी हवन- यज्ञ एवं सत्संग जैसे धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण मनोवेग से संपन्न किए जा रहे हैं। निर्गुण भक्ति धारा या यूं कहें निराकार ब्रह्म को मानने वाले लोग जिनमें आर्य समाजी भी शामिल है, यहां बड़ी भारी संख्या में आकर राष्ट्रीय संत आचार्य सोमदेव आर्य के सानिध्य एवं सोमवृत देव आर्य के नेतृत्व में अनुष्ठान एवं सत्संग आदि कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। वैदिक गुरुकुल में अध्ययनरत छात्रों द्वारा भी वेद अध्ययन के बीच वैदिक ऋचाओं के पठन-पाठन का कार्य निर्बाध गति से जारी है। इसके अलावा चमत्कारी मंदिर के रूप में यूपी, बिहार, पंजाब ,एम पी एवं महाराष्ट्र तक ख्याति प्राप्त बाबा रामदेव एवं शनि देव मंदिर (श्री सांई दास बाबा आश्रम) में भी महन्त श्री गिरिराज शरण महाराज के सानिध्य में असाध्य रोगों से ग्रसीत एवं वैज्ञानिक सोच से परे भूत-प्रेत,जीन्द या फिर उपरीहवाओं के प्रकोप से प्रताड़ित व प्रभावित पीड़ित लोग अपनी हाजिरी लगाकर मौके पर ही रोगों एवं बीमारी से मुक्ति पा कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। जिसके चलते नवरात्रि काल में यहां भी रोज हजारों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही है। इसलिए ही तो कहा या माना जाता है, कि मलारना चौड़ कस्बा श्रृद्धा,भक्ति एवं आस्था का अनोखा एवं अदभुत संगम है। जहां पर सगुण एवं निर्गुण भक्ति धारा के साथ - साथ चमत्कारी एवं रहस्यमयी गंगा की भक्ति रूपी धारा भी अविरल बहते हुए लोक कल्याणकारी भाव को प्रदर्शित कर रही है । ताकि मानव मात्र सुखी एवं निरोगी रहे।
(ब्यूरो चीफ/ विशेष संवाददाता, माटी की महक न्यूज़ राजस्थान )








