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किसी भी दशा में पत्रकारों पर अत्याचार बर्दाश्त नही : अब्दुल माहिर

आई एफ डब्ल्यू जे की मलारना डूंगर इकाई द्वारा मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक के नाम उपखंड अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

सवाई माधोपुर/मलारना डूंगर(चंद्रशेखर शर्मा)। आई एफ डब्ल्यू जे संगठन द्वारा उदयपुर में वरिष्ठ पत्रकारों पर षड्यंत्र रचकर थोपे गए फर्जी मुकदमे व प्रकरण में लिप्त पुलिस अधिकारी द्वारा धमकियां देने व दिलवाने के विरोध में मुख्यमंत्री महोदय व पुलिस महानिदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। संपूर्ण राज्य में आईएफडब्ल्यू जे एवं अन्य पत्रकार संगठनों के द्वारा ज्ञापन देने का दौर जब तक जारी रहेगा तब तक पद, प्रतिष्ठा व ऊंचे रसूखात के घमंड में मदहोश लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ खिलवाड़ करने वाले पुलिस अधिकारी व उसके शागीर्दों को अपनी करनी पर पछतावा ना हो एवं उन्हे कानूनी रूप से दंडित न किया जाए। इसी क्रम में सवाई माधोपुर जिले के विभिन्न उपखंड मुख्यालयों पर संगठन की ओर से पीड़ित पत्रकारों के साथ बदसलूकी करने वाले भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई को लेकर आई एफ डब्ल्यू जे के सदस्यों द्वारा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक एवं उपखंड स्तर पर उपखंड अधिकारीयों को मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक के नाम ज्ञापन सौंपे गए। प्रदेश स्तर पर पुलिस व प्रशासन द्वारा घटना केेे कई दिनों बाद किसी भी प्रकार के एक्शन नहीं लिए जाने पर भी रोष जाहिर किया गया। इसी क्रम में सोमवार को मलारना डूंगर उपखंड मुख्यालय पर भी स्थानीय इकाई द्वारा सीएम व डीजीपी के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में आईएफडब्ल्यूजे के मलारना डूंगर उपखण्ड अध्यक्ष अब्दुल माहिर, उपाध्यक्ष राशिद खान,सरंक्षक चंचल जैन, श्रवण लाल, मृत्युन्जय गौतम, उमाशंकर तिवाड़ी, अकरम खान, प्यारेलाल योगी व सुरेश कुमार योगी आदि पत्रकार गण शामिल रहे। इससे पूर्व भी उक्त मामले को लेकर विगत 30 जून व 01 जुलाई को भरतपुर संभाग में शामिल जिलों के साथ-साथ राजधानी जयपुर , राजसमंद, उदयपुर, बांसवाड़ा, बालोतरा , प्रतापगढ़ , डूंगरपुर, कोटा आदि जिला इकाइयों तथा  बयाना - रुपबास (भरतपुर)धरियावद (प्रतापगढ़), सुल्तानपुर , सांगोद (कोटा) उपखंंड इकाइयों द्वारा सरकारी तंत्र के जिम्मेदार अफसरों को ज्ञापन सौंपकर संपूर्ण प्रकरण में  लिप्त आर पी एस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। और मानसिक दिवालियापन के शिकार उस पुलिस उप अधीक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं उसके भाई के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की गई, बाकी दूसरा कोई भी व्यक्ति गैर जिम्मेदाराना ढ़ंग से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों के खिलाफ झूठीं शिकायतें एवं अन्य तरीके का कोई भी जोखिम उठाने की हिमाकत ना करें।

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